नई दिल्ली: अगर आप इंफेक्शन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों की दवाएं लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। 1 अप्रैल 2025 से 400 से ज्यादा जरूरी दवाओं के दाम बढ़ने वाले हैं। इससे लाखों मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
🔹 कौन-कौन सी दवाएं होंगी महंगी?
➡ एंटीबायोटिक (इंफेक्शन की दवाएं) – जैसे अमोक्सिसिलिन, एज़िथ्रोमाइसिन आदि।
➡ डायबिटीज की दवाएं – मेटफॉर्मिन, ग्लिमिपेराइड, इंसुलिन जैसी दवाओं के दाम बढ़ सकते हैं।
➡ हृदय रोग की दवाएं – एटोरवास्टेटिन, क्लोपिडोग्रेल, बीटा-ब्लॉकर्स आदि महंगे होंगे।
➡ ब्लड प्रेशर कंट्रोल की दवाएं – एम्लोडिपाइन, लिसिनोप्रिल, मेटोप्रोलोल जैसी दवाएं।
➡ पेन किलर और एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स – पैरासिटामोल, डाइक्लोफेनेक, आईबुप्रोफेन आदि।
🔹 कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
➡ API (Active Pharmaceutical Ingredient) की कीमतों में बढ़ोतरी – दवाओं के कच्चे माल की लागत बढ़ गई है।
➡ डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी – दवाओं का उत्पादन महंगा हो गया है।
➡ लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत में वृद्धि – पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और लेबर कॉस्ट भी बढ़ गई है।
➡ राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की मंजूरी – सरकार ने दवाओं के दाम बढ़ाने की अनुमति दी है।
🔹 मरीजों पर क्या असर पड़ेगा?
➡ लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीजों को ज्यादा खर्च करना होगा।
➡ बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग ज्यादा प्रभावित होंगे।
➡ सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य योजनाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
🔹 राहत की कोई उम्मीद?
➡ जन औषधि केंद्रों पर सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
➡ सरकार कुछ दवाओं के दामों पर कंट्रोल लगा सकती है।
➡ आयुष्मान भारत और सरकारी हेल्थ स्कीम्स के तहत मरीजों को कुछ राहत मिल सकती है।