राजेश कुमार वर्मा
समस्तीपुर बिहार प्रांत के समस्तीपुर जिला के रोसड़ा प्रखंड के शारदानगर निवासी संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार के अधीन पर्यटन विभाग में पदस्थापित रवि जी के परिणय सूत्र में बंधने के उपरांत वर-वधू स्वागत समारोह के दौरान पौधा वाले गुरू जी ट्रीमैन के नाम से मशहूर "सेल्फी विथ ट्री"मुहीम के संस्थापक राजेश कुमार सुमन और भारतीय रेल मुंबई में टीटीई के पद पर कार्यरत अशोक कुमार अपनी दमदार अपनी उपस्थिति दर्ज कर वर-वधू को कृत्रिम उपहार के बदले इको फ्रेंडली उपहार के रूप में आम्रपाली आम का पौधा भेंट कर हरित शुभकामनाएं दिया।वर-वधू हरित उपहार पाकर कहा कि यह दुनिया का सबसे अजूबा उपहार है।अपने हाथों से पौधरोपण करने का संकल्प लिया और कहा कि मैं इसे अपने संतान की तरह इसे भी देख-भाल करूँगा।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों से भी भारत माता को पर्यावरण समस्या से आजाद कराने के लिए अपने जन्मदिन व शादी के सालगिरह पर केक काटने के बजाय पौधरोपण कर इको फ्रेंडली जन्मदिन व शादी के सालगिरह मनाने के लिए अपील किया।इसके अलावे सभी आगत अतिथियों से विभिन्न शादी समारोह, जन्मदिन, शादी के सालगिरह, मुंडन, जनेऊ और श्राद्धकर्म में भी चुमावन/उपहार के बजाय पौधा भेंट करने की परम्परा विकसित करने के लिए आग्रह किया।
समस्तीपुर बिहार प्रांत के समस्तीपुर जिला के रोसड़ा प्रखंड के शारदानगर निवासी संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार के अधीन पर्यटन विभाग में पदस्थापित रवि जी के परिणय सूत्र में बंधने के उपरांत वर-वधू स्वागत समारोह के दौरान पौधा वाले गुरू जी ट्रीमैन के नाम से मशहूर "सेल्फी विथ ट्री"मुहीम के संस्थापक राजेश कुमार सुमन और भारतीय रेल मुंबई में टीटीई के पद पर कार्यरत अशोक कुमार अपनी दमदार अपनी उपस्थिति दर्ज कर वर-वधू को कृत्रिम उपहार के बदले इको फ्रेंडली उपहार के रूप में आम्रपाली आम का पौधा भेंट कर हरित शुभकामनाएं दिया।वर-वधू हरित उपहार पाकर कहा कि यह दुनिया का सबसे अजूबा उपहार है।अपने हाथों से पौधरोपण करने का संकल्प लिया और कहा कि मैं इसे अपने संतान की तरह इसे भी देख-भाल करूँगा।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों से भी भारत माता को पर्यावरण समस्या से आजाद कराने के लिए अपने जन्मदिन व शादी के सालगिरह पर केक काटने के बजाय पौधरोपण कर इको फ्रेंडली जन्मदिन व शादी के सालगिरह मनाने के लिए अपील किया।इसके अलावे सभी आगत अतिथियों से विभिन्न शादी समारोह, जन्मदिन, शादी के सालगिरह, मुंडन, जनेऊ और श्राद्धकर्म में भी चुमावन/उपहार के बजाय पौधा भेंट करने की परम्परा विकसित करने के लिए आग्रह किया।