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शिवहर में बाढ़ का खतरा, बागमती और लालबकेया नदी लाल निशान से पार, निचले क्षेत्रों में घुसा पानी

संवाद 


बिहार में नदियां उफान पर हैं. सीतामढ़ी के बैरगनिया के पूर्वी और पश्चिमी छोर पर बहने वाली बागमती एवं लालबकेया नदी खतरे के निशान के पार बह रही हैं. नेपाल के पहाड़ी इलाकों में पिछले 2 दिनों से हो रही वर्षा के कारण दोनों नदियों के जलस्तर में अचानक से वृद्धि हो गई है. शिवहर में बागमती नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाना प्रारंभ कर दिया है, जिसके कारण शिवहर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. बागमती का पानी शिवहर के नरकटिया गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है.इतना ही नहीं बल्कि शिवहर-मोतिहारी एसएच-54 पर पानी का तेज बहाव होने लगा है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है. बेलवा और नरकटिया के निचले क्षेत्रों में पानी का बहाव होने लगा है. मंगलवार (8 अगस्त) को डीएम रामशंकर और एडीएम कृष्ण मोहन सिंह ने बेलवा पहुंचकर बाढ़ की स्थिति के संबंध में खबर ली और आवश्यक आदेश दिया.

जिलाधिकारी ने बताया कि जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी है.

 जिले के सभी अधिकारियों को बाढ़ को लेकर अवकाश को रद्द कर दिया गया है. साथ ही आसपास के लोगों को सावधानी बरतने की अपील की गई है. उन्होंने बोला कि आवश्यकता पड़ेगा, तो कम्युनिटी किचन का भी शुरुआत कल से की जाएगी.बागमती और लालबकेया नदी में भयंकर बाढ़ जुलाई एवं अगस्त में ही ज्यादातर आने का अनुमान रहता है. वर्ष 1993 और 2017 की बाढ़ भी क्रमशः 23 जुलाई एवं 14 अगस्त को ही आई थी, जिसमें काफी ज्यादा मात्रा में जान माल की क्षति हुई थी. बागमती परियोजना के अभियंता भास्कर कुमार ने बताया कि दोनों नदियां तत्काल खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, परंतु यह अभी नियंत्रण में है.बताया गया कि तकनीकी सेल द्वारा इसके जलस्तर का निरीक्षण प्रत्येक घंटे में किया जा रहा है. बैरगनिया के रिंग बांध की सुरक्षा के लिए पुख्ता बंदोबस्त कर लिया गया है. संपूर्ण बांध के डेंजर प्वाइंट पर स्थानीय मिट्टी से भरे बोरे को एकत्रित कर लिया गया है.


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