आमरण अनशन पर बैठे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को जेल तक लेकर जाने के मामले में पटना जिला प्रशासन की तरफ से सफाई दी गई है. प्रशांत किशोर ने मीडिया से बोला था कि उन्हें बेउर जेल ले जाया गया था लेकिन पुलिस के पास पेपर नहीं थे. अब पटना जिला प्रशासन की तरफ से मंगलवार (07 जनवरी, 2025) को बोला गया कि विधि-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सिविल कोर्ट से प्रशांत किशोर को बेऊर थाना लाया गया था.कहा गया कि कोर्ट में उनके (प्रशांत) समर्थकों का काफी जमावड़ा हो गया था जिसके वजह से अन्य फरियादियों को परेशानी हो रही थी. प्रशांत किशोर के वकील की तरफ से बताया गया था कि 25000 का बॉन्ड भरना होगा लेकिन पीके इसके लिए तैयार नहीं थे. बेऊर थाना में कोर्ट के निर्देश की प्रतीक्षा की गई. शाम को कोर्ट का आदेश प्राप्त होने और दोषी द्वारा 25 हजार रुपये का बॉन्ड भरने पर विहित प्रक्रिया के तहत जमानत पर रिहा किया गया है.बता दें कि पहले यह खबर सामने आई थी कि प्रशांत किशोर को शर्त के साथ जमानत दी गई है.
इसके लिए प्रशांत किशोर तैयार नहीं थे.
प्रशांत किशोर के वकील की तरफ से दोबारा बहस के बाद कोर्ट की तरफ से बिना शर्त के जमानत दी गई. इसमें आगे धरना प्रदर्शन नहीं करने वाली शर्त हटाई गई थी.उधर दूसरी तरफ गिरफ्तारी के बाद पुलिस स्वास्थ्य जांच के लिए प्रशांत किशोर को फतुहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई थी. इसके बाद जब प्रशांत किशोर ने रिहाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे तो उन्होंने यह बोला था कि फतुहा में पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने (चिकित्सकों की टीम) फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया. इस पर जिला प्रशासन ने बोला है कि डॉक्टर पर फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट देने या गलत जांच प्रतिवेदन देने के लिए दबाव बनाने का प्रश्न ही नहीं है क्योंकि कोर्ट में पेशी के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती है. मात्र स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट की आवश्यकता होती है. इसमें आरोपी स्वस्थ भी हो सकता है या अस्वस्थ भी हो सकता है. इस प्रकार का इल्जाम सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने की मंशा को दर्शाता है.पटना जिला प्रशासन ने यह भी बोला है कि कोर्ट के निर्देश में ऐसा कुछ नहीं कहा गया है कि उक्त स्थल (बापू मूर्ति गांधी मैदान) पर धरना देना गैर-कानूनी नहीं है. गांधी मूर्ति पार्क धरना स्थल नहीं है. अतः वहां धरना देना सदैव गैर-कानूनी है.