एक निजी चैनल को दिए अपने बयान में लालू यादव ने बोला कि उनके लिए हमारा दरवाजा हमेशा खुला है और उनको भी खुला रखना चाहिए. हमलोग मिल बैठकर निर्णय लेते हैं. हालांकि इससे पहले तेजस्वी यादव ने बोला था कि नीतीश कुमार के लिए दरवाजा बंद है. वो थके हुए सीएम हैं, लेकिन आरजेडी में लालू यादव ही सर्वेसर्वा हैं. उनका निर्णय ही पार्टी में चलता है.
बिहार की सियासत में इन दिनों बहुत खलबली है.
नीतीश कुमार दिल्ली गए और ना जेपी नड्डा से मिल सके और ना ही गृह मंत्री अमित शाह से. इसके पीछे की वजह कोई बड़ा राजनीतिक टकराव है. यानी नाराजगी की बात जो बोली जा रही है, वो सौ प्रतिशत सत्य साबित हो रही है. वहीं लालू यादव राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, मौके की नजाकत को देखते हुए वो अपने निर्णय बदल भी लेते हैं और उस पर अडिग भी रहते हैं. अब जबकि बीजेपी और जेडीयू के बीच कुछ खटपट नजर आ रही है तो उनके लहजे में नीतीश कुमार को लेकर नर्मी नजर आने लगी है. हालांकि उन्होंने ये भी बोला कि वो तो भाग जाते हैं, चले जाते हैं. बहरहाल अब बिहार के दिग्गज नेताओं की सियासत क्या गुल खिलाएगी ये तो वक्त ही बताएगा. वैसे बिहार के राजनीतिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि बिहार की सियासत कब करवट ले ले, कुछ कहा नहीं जा सकता.