अपराध के खबरें

एक था केजरीवाल: क्या खत्म हो रहा है अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक करियर?

संवाद 

नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति में एक समय अरविंद केजरीवाल का जलवा था। 2013 में जब उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) बनाकर राजनीति में कदम रखा, तो वे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के पोस्टर बॉय बन गए। देखते ही देखते दिल्ली की जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बैठा लिया और 2015 के विधानसभा चुनावों में AAP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। लेकिन क्या आज केजरीवाल की लोकप्रियता खत्म हो रही है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उनके लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं।

केजरीवाल का राजनीतिक सफर: एक आम आदमी से मुख्यमंत्री तक

अरविंद केजरीवाल ने 2011 में अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन से लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी के खिलाफ जनता के गुस्से को एक नई राजनीतिक ताकत में बदला और 2013 में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 49 दिनों में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया, लेकिन 2015 में ऐतिहासिक वापसी करते हुए 70 में से 67 सीटें जीतकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो गए।

2020 तक अपराजेय दिखे, लेकिन 2024 में संकट गहराया

2020 में केजरीवाल ने फिर से 62 सीटें जीतकर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा बरकरार रखा।

पंजाब में 2022 का विधानसभा चुनाव जीतकर AAP ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव और ED-CBI की जांच ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं।


क्या कहता है हालिया राजनीतिक परिदृश्य?

1. घोटालों के आरोप: दिल्ली में कथित शराब नीति घोटाले को लेकर CBI और ED ने कई नेताओं को गिरफ्तार किया। खुद केजरीवाल भी इन एजेंसियों के रडार पर हैं।


2. सहयोगियों की गिरफ़्तारी: AAP के बड़े नेता मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पहले ही जेल में हैं, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हुई है।


3. लोकसभा चुनाव में झटका: 2024 के लोकसभा चुनाव में AAP के प्रदर्शन ने पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। दिल्ली और पंजाब में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।


4. गठबंधन की राजनीति: आम आदमी पार्टी ने विपक्षी गठबंधन INDIA में शामिल होकर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला, लेकिन खुद की स्थिति मजबूत नहीं कर पाई।



क्या अब खत्म हो जाएगा केजरीवाल युग?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केजरीवाल की राजनीति अब सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। अगर वे इन चुनौतियों से उबर नहीं पाए, तो उनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।

भविष्य की राह:

✔ अगर वे भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को बचाने में सफल रहे, तो उनकी छवि फिर से मजबूत हो सकती है।
✔ अगर दिल्ली सरकार के कामकाज पर असर पड़ा और पार्टी नेताओं की मुश्किलें बढ़ती गईं, तो AAP का पतन शुरू हो सकता है।
✔ पार्टी को जमीनी स्तर पर दोबारा मजबूत करने की जरूरत है, ताकि जनता का विश्वास बरकरार रहे।


अरविंद केजरीवाल की राजनीति आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। "एक था केजरीवाल" कहना शायद जल्दबाजी होगी, लेकिन अगर वे हालिया संकटों से नहीं उबर पाए, तो आने वाले समय में AAP के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।


إرسال تعليق

0 تعليقات
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

live